पूजा व सेवा
ऑनलाइन केवल स्थान सुरक्षित होता है। दक्षिणा मंदिर के काउंटर पर ही दी जाती है, इस वेबसाइट पर कोई भुगतान नहीं लिया जाता।
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दीपमालिका (दीप स्तंभ प्रज्वलन)
यह यहाँ की सबसे प्रसिद्ध सेवा है। श्रद्धालु प्रायः मनोकामना पूरी होने पर दोनों स्तंभों के तेल और बाती का खर्च उठाते हैं, और दीप संध्या आरती पर जलाए जाते हैं। बुकिंग मंदिर कार्यालय से होती है और तारीखें महीनों पहले भर जाती हैं। वर्ष 2023 की समाचार रिपोर्टों में सामूहिक बुकिंग का शुल्क ₹3,100 प्रति श्रद्धालु और दोनों स्तंभ जलाने का खर्च लगभग ₹15,000 बताया गया है। वर्तमान शुल्क की पुष्टि मंदिर से करनी चाहिए।
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प्रातः आरती
दीप, घंटियों और स्तुति के साथ देवी की दैनिक प्रातःकालीन पूजा। श्रद्धालु इसमें निःशुल्क शामिल हो सकते हैं।
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संध्या आरती
संध्या की आरती, जो प्रांगण में जगमगाते दीप स्तंभों के बीच होती है। यह दिन का सबसे अधिक भीड़ वाला अनुष्ठान है और इसके लिए कोई टिकट नहीं लगता।
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चुनरी, सिंदूर और नारियल अर्पण
देवी को चढ़ाई जाने वाली पारंपरिक भेंट: लाल चुनरी, नारियल, फूल और सिंदूर। सिंदूर परंपरा से श्रीयंत्र पर चढ़ाया जाता है। यह सामग्री मंदिर के बाहर की दुकानों पर मिल जाती है।
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नवरात्रि विशेष पूजन
नवरात्रि के नौ दिनों में देवी का विशेष शृंगार होता है, दीप स्तंभ हर शाम प्रज्वलित किए जाते हैं और विशेष आरती तथा हवन-यज्ञ होते हैं। भीड़ के कारण इन दिनों गर्भगृह में आम श्रद्धालुओं का प्रवेश बंद रखा जा सकता है।
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कर्कोटेश्वर महादेव पूजन
परिसर में स्थित एक छोटा शिव मंदिर, जिसे परंपरा नागराज कर्कोटक से जोड़ती है। श्रद्धालु यहाँ जल चढ़ाकर पूजा करते हैं, और कुछ लोग नाग दोष की शांति के लिए अनुष्ठान भी करवाते हैं।